:अरबिन्द'अश्क़'
हम भारतीय कितने अजीबो गरीब है जब हमें यानि हमारी सभ्यता और हमारे वास्तविक जीवन को कोई विदेशी समझने की कोशिश करेगा तो उलझ सा जायेगा की वास्तविक रूप से हम किसे मानते है हमारी स्थिति हाथी की दांत की तरह दिखावटी है क्यों की हमारी सभ्यता है कि हम प्रेम रूपी जोड़ी राधा-कृष्ण की पूजा तो करते है पर समाज में प्रेम करने वालो की कुत्ते से भी बुरी स्थिति बना दिए है, कहने को समाज प्रधान देश है पर इसी समाज में लोग भूखे मर जाते है पर कोई पूछने वाला नहीं होता पर सबको समाज के साथ रहना है।
प्रेम करने वालो को समाज के हजारों सवालो के जवाब देने पड़ते है पर उसी समाज में किसी औरत को दहेज़ के लिए उसकी हत्या कर दी जाती है तो वही समाज गूंगा ,बहरा ,लूला ,लंगड़ा सब हो जाता है फिर कानूनी लड़ाई लड़ी जाती है ।
धिक्कार है ऐसे दो मुंहे समाज पर जो पहले धर्म को लेके प्यार को रोकता है जब धर्म एक हो तो जाति का बहाना और जब जाति एक हो तो धन दौलत का बहाना,जब धन दौलत में ना घेर सके तो समाज का डर दिखाता है।मेरा मानना है कि अपने धर्म में इतनी शक्ति है कि सबको साथ मिलाकर ले चले पर इसी समाज ने धर्म की परिभाषा अपने अनुसार गढ़ दी है। छुआ- छूत, ऊंच -नीच ,बड़ा -छोटा बस इसी में परेशान है । मौजूदा समाज में प्रेम करने वाले भी कही न कही दोषी है जो प्रेम की चादर ओढ़कर अपनी वासना की तृप्ति करते है और जो समाज में प्रेम की जगह वासना का पर्याय बन गया है।प्रेम अगर सच्चा है तो उसे निभाने की सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए।प्रेम का मतलब ये नहीं की आप सबको छोड़ दे पर सब आपको छोड़ दे तो आपको अपने प्यार पर गर्व करना चाहिए क्योंक़ि प्रेम का मतलब जोड़ से है ना की तोड़ से पर जो आपसे प्रेम करते है वो और जिनको आपके प्यार में सच्चाई दिखेगी वो आपके साथ सदैव रहेगे। मुझे अपने सनातनी होने का गर्व है जिसमे मुझे खुल के जीने की आजादी मिली
बस समाज की सोच बदलनी है जो एक दिन बदलेगा ऐसा मुझे यकीन है ।